Friday, September 10, 2021

प्रधानमंत्री जी, गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाकर ग्रामीणों को लकड़ी काटने में कर रहे हैं मजबूर

प्रधानमंत्री जी, गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाकर ग्रामीणों को लकड़ी काटने में कर रहे हैं मजबूर

कोरोना काल में फ्री में दिए गए गैस सिलेंडर के दाम अब निर्धनों से वसूल रही है सरकार



अजय नागेश्वर संवाददाता
सिवनी/उगली। गोंडवाना समय।

ग्रामीण क्षेत्र एवं ग्रामीणों की हालत बेहद खराब एवं चिंताजनक है।‌ कोरोना वायरस संक्रमण के बाद आई आर्थिक समस्या के कारण अधिकांश ग्रामीणजन गैस सिलेण्डर नहीं भरवा पा रहे हैं। वही ग्रामीणों में यह भी चर्चा चल रही है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि कोरोना संक्रमण के दौरान देश में लगे लॉकडाउन मे जो उज्ज्वला योजना के तहत 3 महीने तक उज्जवला योजना के हितग्राहियों को फ्री में गैस भरवाने के लिए खाते में जो पैसे डाले गए थे। शायद गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा कर निर्धनों से अब केंद्र सरकार पैसों की वसूली कर भरपाई कर रही है। वही बढ़ती महंगाई के कारण अधिकांश परिवारों में तनाव की स्थिति बनी हुआ है।

लॉकडाउन के बाद आई आर्थिक तंगी से, गैस सिलेंडर भरवाने में ग्रामीणों में बन रही बाधा

हम आपको बता दें कि प्रदेश में सभी घरेलू उपयोग में आने वाली चीजों के दाम बढ़ गए हैं। सबसे ज्यादा समस्या बेसहारा बुजुर्गों एवं निर्धन परिवारों को हो रही है। वही ग्रामीणजन व श्रमिक परिवारजन बढ़ती महंगाई की मार झेलने को मजबूर है। देश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को फ्री में गैस कनेक्शन दिया गया था ताकि ग्रामीण जंगल जाकर लकड़ी ना लाएं एवं घर में गैस से भोजन पकाए ताकि माताओं को धुएं से होने वाली समस्या से बचाया जा सके और पर्यावरण भी सुरक्षित रह सके लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण ग्रामीण अब फिर से जंगल में लकड़ी काटने को मजबूर हो जाएंगे।

ग्रामीणों ने गोंडवाना समय को हकीकत 

गोंडवाना समय संवाददाता ने उगली क्षेत्र के ग्रामीण महिलाओं से चर्चा किया। गोंडवाना समय ने पूछा कि आप खाना किसमे बनाते हो तो ग्रामीण महिलाओं ने कहा चूल्हे में, फिर गोंडवाना समय ने पूछा चूल्हे में क्यों गैस कनेक्शन नहीं मिला क्या? तो ग्रामीण महिलाओं ने कहा सर गैस का रेट अधिक होने की वजह से हम चूल्हे में खाना बनाने को मजबूर है। लॉकडाउन के बाद आई आर्थिक तंगी से अभी तक हम जूझ रहे है हमारे पास गैस सिलेण्डर भरवाने के लिये रूपये की व्यवस्था नहीं है। 

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