Sunday, October 31, 2021

वर्तमान परिवेश में आदिवासी जनजाति समुदाय का विकास राज्य सरकार की प्रमुखता है-कांति नाग

वर्तमान परिवेश में आदिवासी जनजाति समुदाय का विकास राज्य सरकार की प्रमुखता है-कांति नाग 

राज्य योजना आयोग की सदस्य कांति नाग ने किया अपने कार्यालय का शुभारंभ

कांति नाग ने कहा शिक्षा एवं संस्कृति के विकास में सदैव तत्पर रहूंगी


अंतागढ़/कांकेर। गोंडवाना समय।

राज्य योजना आयोग की जनजातीय समूह की शिक्षा एवं संस्कृति की सदस्य कांति देवी नाग ने अंतागढ़ अपने कार्यालय का शुभारंभ किया।


शुभारंभ के दौरान क्षेत्रीय विधायक अनूप नाग सहित बड़ी संख्या में कांति नाग के समर्थक मौजूद रहे। कार्यालय शुभारंभ के पश्चात कांति नाग ने अपने ईष्ट देव की पूजा अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगो ने श्रीमती कांती नाग को बधाई और शुभकामनाएं दी ।

प्रत्येक जनजाति अपने विशिष्ठ संस्कृति से जानी जाती है


इसके पश्चात कांति नाग ने सभा को संबोधित करते हुए कहा की आप सभी की उपस्तिथि मेरे लिए बेहद अभूतपूर्व है। मैं हृदय से आप सभी को धन्यवाद देती हूं। इसके साथ ही उन्होंने कहा की आप सभी के प्रेम और विश्वास से ही मुझे लोगो की सेवा करने की शक्ति और प्रेरणा मिलती है।
            इसके बाद उन्होंने जनजातीय समूह की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए सामान्य भाषा, एक नाम, निश्चित भू भाग, सामान्य संस्कृित, परिवारों का एक समूह, नातेदारी का महत्व, अंतर्विवाही समूह, राजनैतिक संगठन, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामान्य विशेष जैसी बिंदुओं पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने सामान्य संस्कृति के विषय पर कहा की प्रत्येक जनजाति अपने विशिष्ठ संस्कृति से जानी जाती हैं किंतु एक ही जनजाति के सभी सदस्य में एक सामान्य संस्कृति अर्थात प्रथाएं, रीति रिवाज, नृत्य, धर्म, खान पान, रहन सहन होता है ।

जंगल ही इनका जीवन है तथा आधुनिकता की चकाचौंध से कोसों दूर है


कांति नाग ने फिर आगे कहा की भारतीय समाज में विभिन्न जनजातियों का पाया जाना हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। आधुनिक युग की खोज उपभोगवाद पर आधारित है किन्तु आदिम इतिहास के संदर्भ में आदिम जनजातीय का अध्ययन करना भी आधुनिक समाज की आवश्यकता है। ये आदिम आदिवासी जनजाति जंगलों में निवास करती है, जंगल ही इनका जीवन है तथा आधुनिकता की चकाचौंध से कोसों दूर है।  ऐसे मेरे भाई बहनों एवं युवा शक्ति को मुख्य धारा में लाके उन्हें शिक्षा के दिशा में आगे बढाने का प्रयास करना है ।

समाज का कर्तव्य है कि समाज का प्रत्येक प्राणी सुखी सम्पन्न जीवन यापन करें

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और मानवीय विकास का चक्र निरन्तर चलता रहता है। समाज का कर्तव्य है कि समाज का प्रत्येक प्राणी सुखी सम्पन्न जीवन यापन करें। इस हेतु सरकार ने विभिन्न प्रकार की योजनाओं का क्रियान्वयन किया है, वर्तमान परिवेश में आदिवासी जनजाति समुदाय का विकास राज्य सरकार की प्रमुखता है।             देश के सम्पूर्ण विकास में सभी समुदाय का सहयोग आवश्यक है, किसी एक समुदाय को छोड़कर देश का समग्र विकास नहीं किया जा सकता है इतिहास इस बात का साक्षी है कि विश्व की अनेक मानव जातियों ने विकास का कदम एकसाथ रखा जिसमें से कुछ मानव जातियों ने अपना विकास परिष्कृत रूप से किया और आधुनिक प्रजातियों में आ गये ।

यदि कोई इनके क्षेत्रों में अतिक्रमण करें तो ये सीधे-सादे आदिवासी भी उम्र हो उठते है

किन्तु आधुनिक युग में अनेक आदिम जाति विलुप्त हो गई या विलुप्ति के कगार पर है किन्तु भारतीय आदिम जनजाति ने अपने आपको विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रखा हैं जो कि भारतीय जनजातियों की प्रमुख विशेषता है। पराधीनता के समय में जब अंग्रेजों ने इनके निवास स्थलों पर अतिक्रमण किया तो ये सीधे-सादे आदिवासियों ने अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध अपने परम्परागत हथियारों ( तीर-धनुष, भाले ) से लड़ाई लड़ी ।
             बिरसा मुण्डा आदिवासी समुदाय ने आजादी की लड़ाई में नेतृत्व किया और अपनी साहसिक प्रवृत्ति का परिचय दिया। ये आदिवासी और जनजातियाँ जंगलों, नदी, नालों और जंगली जानवरों के बीच सदियों से सहचर करते आ रहे हैं। यदि कोई इनके क्षेत्रों में अतिक्रमण करें तो ये सीधे-सादे आदिवासी भी उम्र हो उठते हैं ।
             ये आदिवासी समुदाय जो सदियों से जंगलों में रहते आ रहे हैं, इन जनजातियों में सामाजिक, आर्थिक विकास की कोई खास होड़ भी नहीं है, इसी कारण इस समुदाय में सदियों बाद भी विकासात्मक परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है। ये जनजाति अपने परिवार, समाज में ही खुश या सुखी सम्पन्न है, वर्तमान में ये जनजाति अत्यंत पिछड़ी, गरीब, अभावग्रस्त और मुख्यधारा से विमुख है। 

शिक्षा एवं संस्कृति से जुड़ी कोई मांग, सुझाव या कोई शिकायत हो तो वे सभी सीधे मुझसे मेरे कार्यालय में आकर मिल सकते है 

भारतीय समाज में किसानों, दलितों, स्त्रियों, आदिवासियों और जनजातियों का एक ऐसा विशाल समूह हमेशा से विद्वमान रहा है, जो सामाजिक, आर्थिक, राजनीति और सरकारी योजनाओं से हमेशा से ही वंचित और विकास से विमुख रहा है। पूर्ववर्ती सरकार ने पहले तो इन वंचित समूहों के विकास हेतु कोई खास योजना ही नहीं बनाई और यदि वर्तमान में इन समूहों को मुख्य धारा से जोड़ने की योजना बनाई भी गई तो सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ ये समूह नहीं उठा पा रहे हैं।
            अभी मैं वर्तमान में शिक्षा एवं संस्कृति की सदस्य हूं तो मेरा कर्तव्य है की मै ऐसे मेरे भाइयों, बहनों, युवा शक्ति को शिक्षा एवं संस्कृति के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास करूंगी, साथ ही किसी भी व्यक्ति को शिक्षा एवं संस्कृति से जुड़ी कोई मांग, सुझाव या कोई शिकायत हो तो वे सभी सीधे मुझसे मेरे कार्यालय में आके मिल सकते है मैं सभी को विश्वास दिलाती हूं की मै सभी वर्गो के लिए कार्य करूंगी, चाहे वो मेरे आदिवासी भाई बहन हो या मेरे बंगाली भाई बहन, सभी मेरे लिए समान है ।

इस दौरान ये रहे मौजूद 

इस दौरान विश्राम गावड़े, वीर सिंह उसेंडी, मुकेश ठक्कर, दिलीप बघेल,  दुर्गेश ठाकुर, अखिलेश चंदेल, राजाराम कोमरा, गजेंद्र उसेंडी, सियाराम पूडो, जागेश्वर नाग, भजन कुमेटी, जगनाथ कुमेटी, सुकलाल दुग्गा, सुरेश सलाम, सुशील मरकाम, शेख शरीफ कुरेशी, राकेश गुप्ता, पार्षद वीरेंद्र पटेल, किशोर मरकाम, अशोक सलाम, भूरू वर्मा, डॉक्टर सरकार, संतोष मंडल, पुष्पा ध्रुव,  मानती बाई, शांति रजक, दयाराम दुग्गा, सोहन हिचामी, ज्ञानीलाल नायक, अरुणा नाग, सुकलाल यादव, साडू राम बेलसरिया, विष्णु, जयलाल गावड़े, केशव धनेलिया, चंद्रज्योत रामटेके, सूर्यकांत यादव, गोपाल सेन, नारायण निषाद, अनिल पटेल, लोहिया, पंकज साहा, अनिमेष चक्रवर्ती, इंद्रजीत विश्वास, अमल बड़ाई, मुकुल पाल, संतोष कीर्तनिया, शुक्ला साहा, मनोज बड़ाई, सूरज विश्वास, सुप्रकाश मल्लिक, प्रणव मंडल, पार्थ मंडल, इंद्रजीत पारामणिक, संजय विश्वास, निहार सरकार, हर्षित मृधा, गोपाल कुंडू, महादेव कुंडू, संजीत गाइन, गौतम मंडल, लक्ष्मण देवनाथ, रंजित दे, साधन विश्वास समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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