Sunday, January 30, 2022

सामान्य, पिछड़ा व अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मियों की पदोन्नतियां तत्काल प्रारंभ करने ठोस निर्णय ले सरकार-सपाक्स

सामान्य, पिछड़ा व अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मियों की पदोन्नतियां तत्काल प्रारंभ करने ठोस निर्णय ले सरकार-सपाक्स

म.प्र सरकार पूरी तरह से 64% वर्ग के हितों को दरकिनार कर विगत 6 वर्षों से अन्याय कर रही है

सरकार द्वारा सार्थक कार्यवाही नहीं करने पर सपाक्स पूर्व की तरह खड़ा करेगी जन जागरूकता आंदोलन 


सिवनी। गोंडवाना समय।

मा. सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की पीठ द्वारा 28 जनवरी 2022 को पदोन्नति में आरक्षण को लेकर दिए गए फैसले पर सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स के जिला नोडल अधिकारी एवं जिला अध्यक्ष प्रद्युम्न चतुर्वेदी ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि मा.न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि पदोन्नति में आरक्षण हेतु एम. नागराज प्रकरण और जरनैल सिंह प्रकरण में निश्चित किए गए मार्गदर्शी सिद्धांतो का पालन अनिवार्य होगा। यह उल्लेखनीय है कि पदोन्नति में आरक्षण बंधनकारी अधिकार नहीं हैं बल्कि राज्य विशेष यदि चाहे तो पदोन्नति में आरक्षण के लिए कुछ बंधनकारी शर्तों का पालन करना आवश्यक है। एक बार फिर मा. न्यायालय के निर्णय ने इसे ही पुष्ट किया है।

म.प्र सरकार द्वारा वर्ग विशेष के लिए अनावश्यक रूप से प्रदेश में पदोन्नति की प्रक्रिया रोक कर रखी है

सपाक्स जिला नोडल अधिकारी एवं जिला अध्यक्ष प्रद्युम्न चतुर्वेदी ने बताया कि मप्र पदोन्नति नियमों को 30 अप्रेल 2016 को मा. उच्च न्यायालय ने एम. नागराज प्रकरण में निर्धारित मार्गदर्शी सिद्धांतो के अनुरूप न पाते हुए असंवैधानिक करार देकर हुए खारिज कर दिया था। मा. सर्वोच्च न्यायालय ने पुन: यह स्पष्ट कर दिया है कि एम. नागराज और जरनैल सिंह प्रकरण में निर्धारित मापदंडो का पालन करते हुए ही किसी प्रकार के नियम बनाए जा सकते हैं। अब यह स्पष्ट है कि म.प्र सरकार द्वारा वर्ग विशेष के लिए अनावश्यक रूप से प्रदेश में पदोन्नति की प्रक्रिया रोक कर रखी है, जबकि अनारक्षित श्रेणी में पदोन्नति हेतु किसी प्रकार की कोई रोक न तो उच्च न्यायालय ने लगाई थी न ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पदोन्नतियां रोकी गई थीं। 

सपाक्स संस्था प्रांतीय पदाधिकारियों के नेतृत्व में लगातार मुख्यमंत्री एवं अन्य संबंधितों को अवगत कराती रही है

सपाक्स संस्था प्रांतीय पदाधिकारियों के नेतृत्व में लगातार इस तथ्य से स्वयं मुख्यमंत्री एवं अन्य संबंधितों को अवगत कराती रही। तथा सपाक्स वर्ग की पदोन्नतियां करने की गुहार लगाती रही है। म.प्र सरकार पूरी तरह से 64% वर्ग के हितों को दरकिनार कर विगत 6 वर्षों से अन्याय कर रही है। नतीजा यह कि सरकार द्वारा हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति व आर्थिक लाभ के सेवानिवृत कर दिए गए जबकि ऐसे कर्मी सरकार द्वारा उच्च पदों पर स्थापित किए गए जिन्हें वास्तव में वहां होना ही नहीं चाहिए जहां वे हैं। निर्णय में मा. पीठ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि एम. नागराज के वर्ष 2006 के निर्णय के बाद से ऐसे कोई भी नियमों जो एम. नागराज प्रकरण के सिध्दांतो का परिपालन नहीं करते, के अंतर्गत की गई सभी पदोन्नतियां गलत हैं। अत: ऐसे नियमों से लाभान्वित सभी कर्मी पदावनत होंगे जैसा कि मा. उच्च न्यायालय जबलपुर ने अपने निर्णय में कहा है।

सामान्य, पिछड़ा व अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मियों की पदोन्नतियां तत्काल प्रारंभ करने कलेक्टर को सौपेंगे ज्ञापन

सपाक्स जिला नोडल अधिकारी एवं जिला अध्यक्ष प्रद्युम्न चतुर्वेदी ने आगे बताया कि सपाक्स संस्था एक बार फिर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री एवं पदोन्नति नियमों हेतु गठित मंत्री समूह से अनुरोध करती है कि संविधान प्रदत्त व्यवस्था के अनुरूप ही किसी प्रकार के नए नियम बनाए जाएं तथा जब तक प्रकरण में अंतिम निर्णय नहीं आता। सामान्य, पिछड़ा व अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मियों की पदोन्नतियां तत्काल प्रारंभ करे। संस्था इस संबंध में एक बार फिर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को ज्ञापन देकर उनसे कार्यवाही सुनिश्चित करने की अपील करेगी। संस्था की सभी जिला/ तहसील स्तर की इकाइयां अगले सप्ताह जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपेंगी।

26/27 फरवरी को भोपाल में प्रांतीय सम्मेलन किया जायेगा आयोजित

सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स के जिला नोडल अधिकारी प्रद्युम्न चतुर्वेदी, एन.एस.बैस, चुनेंद्र बिसेन, पीयूष जैन, अजय शर्मा, एस.खान, के.एस. सोनी ने कहा है कि 24 फरवरी 2022 से प्रकरण में निरंतर सुनवाई होनी है। 26/27 फरवरी को भोपाल में निर्धारित कोविड नियमों का पालन करते हुए अधिकारी/कर्मचारी संस्था सपाक्स का प्रांतीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा और सरकार द्वारा कोई सार्थक कार्यवाही न करने की स्थिति में प्रांतीय सम्मेलन में प्रदेश व्यापी गतिविधियों की रूपरेखा निश्चित कर एक बार फिर पूर्व की तरह जन जागरूकता हेतु आंदोलन खड़ा किया जावेगा।

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