Friday, January 7, 2022

गोंडवाना धरती में महान प्राकृतिवादी वैचारिक क्रांति को जन-जन तक पहुंचाने लिया संकल्प

गोंडवाना धरती में महान प्राकृतिवादी वैचारिक क्रांति को जन-जन तक पहुंचाने लिया संकल्प

कोयापुनेमी मांदी में हुआ 4 घंटे का प्रशिक्षण, जीएसयू ग्रामीण कार्यकारणी  का किया गठन


छिंदवाड़ा। गोंडवाना समय। 

गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के द्वारा छिंदवाड़ा जिले के कपरवाड़ी छिंदवाड़ा में मोहन बट्टी, सुशील गुर्गा, जितेंद्र काकोड़िया, देवरावेन भानसा भलावी द्वारा कोयापुनेमी मांदी में ग्रामीण युवक व युवतियों को 4 घंटे का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ग्रामीण क्षेत्र में गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन का गठन भी किया गया।  ग्रामीण कार्यकारिणी में नवनियुक्त सभी पदाधिकारियों को बधाई शुभकामनायें देते हुये उन्हें अपनी जिम्मेदारी को निभाने के लिए आगे कदम बढ़ाने के लिये उनका हौंसला बढ़ाया। 

प्रशिक्षण में सवाल-जवाब, विचार-विमर्श के साथ ही गंभीरतापूर्व हुई चर्चा 


कपरवाड़ी में प्रशिक्षण में शाम 8:00 से 12:00 तक विशाल चर्चा संपन्न हुई, जिसमें कई प्रकार के सवाल-जवाब, विचार विमर्श हुआ, मानव की उत्पत्ति, प्रकृति का मौसम और फसली चक्र, सुर असुर और आर्यों का आक्रमण, दैवीय शक्ति और प्रकृति शक्ति, संवैधानिक, सामाजिक, साहित्यिक, शैक्षणिक, ऐतिहासिक, आर्थिक  मुद्दों पर 3 से 4 घंटे का प्रशिक्षण बोर्ड मार्कर के माध्यम से समझा समझा कर दिया गया। वैज्ञानिक दृष्टिकोण का बढ़ावा देते हुए कई प्रकार के अंधविश्वास और मनगढ़ंत विचारों उलझनओ, को विचार व्यक्त करके सुलझाया गया, कई प्रकार की गलत अवधारणा सुधारने को लेकर चर्चा हुई। गोंडवाना धरती की इस महान प्राकृतिवादी वैचारिक क्रांति को हर किसी व्यक्ति समुदाय के विचारों में शामिल करने और उस वैचारिक क्रांति से विचारों के माध्यम से एक होकर संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया गया।

जल, जंगल, जमीन को बचाने न्यायायिक निर्णयों के साथ ही संवैधानिक अधिकारों की दी जानकारी 


जल, जंगल, जमीन, स्वाभिमान हक अधिकार के मुद्दे पर आरटीआई के द्वारा प्राप्त सभी डाक्यूमेंट्स और हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न जजमेंट को पढ़कर सुनाया गया और संवैधानिक रूप से कैसे जाग कर हम अपने हक अधिकार को पाएं और विभिन्न प्रकार की गलत मानसिकता, दुर्विचार, गैर सांस्कृतिक गतिविधि, बैठक में मौजूद मातृ शक्तियों के माध्यम से विचार रखा गया जिन्हे उपस्थिति सभी युवा बुर्जुग ने आपसी विचार विमर्श करके सुलझाया, समाधान किया। गोंडवाना धरती की इस महान वैचारिक क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए सभी ने संकल्प लिए।

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