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भारत की एकमात्र अंतरराज्यीय पेंच परियोजना जो 60 सालों में भी नहीं हुई पूरी

भारत की एकमात्र अंतरराज्यीय पेंच परियोजना जो 60 सालों में भी नहीं हुई पूरी

पेंच परियोजना कि परिकल्पना और सर्वे 1960  में पहली बार हुआ था


सिवनी। गोंडवाना समय। 

सिवनी जिले के लिए सबसे पहले जब माचागोरा डैम का निर्माण किया गया था तब जिले की 42 से 45000 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन विगत रबी की फसल  सीजन में महज 14000 हेक्टेयर की भूमि सिंचित हो पाई वहीं स्थानीय और सांसद व विधायकों की लापरवाही व उदासीनता के चलते सिवनी क्षेत्र के हिस्से का पानी लगातार घटता गया और इसका फायदा महाराष्ट्र को हुआ है।


पेंच व्यपवर्तन परियोजना से छिंदवाड़ा जिला अपने हिस्से की सिंचाई का रकबा समय पर पूरा कर लिया है। वही सिवनी जिला जिसके लिए लगभग 42 से 45000 हेक्टेयर तक भूमि सिंचित की जानी थी इसी लापरवाही और उदासीनता के चलते सिवनी जिले का सिंचाई का लक्ष्य 42 से 45000 हेक्टेयर से घटकर महज बीते 22000 हेक्टेयर तक सिमट कर रह गया है।

नहरों का बेकार निर्माण करवाया जा रहा है इससे पानी पहुंचना असंभव दिख रहा है


पेंच परियोजना भारत की इकलौती ऐसी अंतराज्यीय परियोजना है जो पिछले 60 सालों में भी पूरी नहीं हो पाई है। इस परियोजना कि परिकल्पना और सर्वे 1960  में पहली बार हुआ जब 2011 में कार्य प्रारंभ हुआ जो आज तक पूरी नहीं हो पाई है। यदि सिवनी जिला का सिंचाई का लक्ष्य 42,000 से 45000 हेक्टेयर होता तो आसानी से सभी क्षेत्रों में पानी मिल जाता जिसमें लाल माटी क्षेत्र, बाकी बखारी क्षेत्र और कलार बाकी का पूरा क्षेत्र सिंचित हो जाता लेकिन कम लक्ष्य के चलते अब नहरों का बेकार निर्माण करवाया जा रहा है इससे पानी पहुंचना असंभव दिख रहा है।

27 अप्रैल दिन बुधवार को बड़ी संख्या में जिले भर के किसान सिवनी पहुंचेंगे


वही अपनी मांगों को लेकर 25 अप्रैल से केवलारी क्षेत्र के किसान अपनी मांगों को लेकर केवलारी से किसान पैदल मार्च निकाल रहे थे रास्ते में सिवनी क्षेत्र के किसानों ने भी इस पैदल मार्च को समर्थन दिया और उन्होंने भी अपनी मांगों को मनवाने के लिए आगामी 27 अप्रैल दिन बुधवार को बड़ी संख्या में जिले भर के किसान सिवनी पहुंचेंगे जहां वह अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। वही यह किसान पैदल मार्च 26 अप्रैल की रात्रि में कंडीपार में विश्राम करेंगे सभी किसानों से अपील की गई है कि वह रात्रि के समय में ही कंडिपार में एकत्रित हो और 27 तारीख को होने वाले मांगों के लिए प्रदर्शन में सहयोग दें।

नहर विकास सत्याग्रह में शामिल हुए विभिन्न ग्रामो के लोगों ने पद यात्रा में शामिल होकर दिया समर्थन


भीमगढ़ बांध से निकलने वाली क्षेत्र की एलबीसी और आरबीसी नहर की सुधार की मांग हेतु केवलारी नगर से सिवनी तक पदयात्रा निकाली गई। जिसमें जिले के केवलारी क्षेत्र के ग्रामीण बड़ी संख्या में  शामिल होकर पदयात्रा करते हुए सिवनी के लिए निकले। हम आपको बताते चले कि क्षेत्र के सिंचाई हेतु बने बांध की निकली नहरे आरसीबी और एलबीसी के समय के साथ सिंचाई का रकबा लगभग डेढ़ गुना बढ़ा है लेकिन नहर से पूरी क्षमता के साथ पानी छोड़े जाने के बाद भी पानी बहुत से क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

इसलिए दोनों नहर में लगभग 40 गांव की फसलें कई बार सूखने की कगार पर आ जाती है जबकि दोनों तरफ की नहरों में कुछ जगह सुधार का काम करवा कर नहर में ज्यादा पानी दिया जा सकता है। इससे क्षेत्र में अनाज की पैदावार भी बढ़ेगी और किसानों को फसलें सूखने से बचेगी इसी मांग को लेकर आज 25 अप्रैल को केवलारी से सिवनी तक पदयात्रा निकाली गई। पदयात्रा टेकारांझी में आज रात्रि विश्राम के बाद सुबह पुन: निकलेगी।

 

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