Type Here to Get Search Results !

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आदिवासी अधिकार विशेष चर्चा के केंद्र में रहे

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आदिवासी अधिकार विशेष चर्चा के केंद्र में रहे 

प्रदेश स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस 2025 का घंसौर में भव्य आयोजन


घंसौर। गोंडवाना समय। 

कोयतोड़ गोंडवाना महासभा के तत्वावधान में रविवार को कृषि उपज मंडी परिसर में प्रदेश स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस 2025 का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय संघ द्वारा घोषित दिवस की थीम रही—आदिवासी लोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता : अधिकारों की रक्षा, भविष्य को आकार देना, जिसके अंतर्गत पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक तकनीक के संबंध पर विशेष चर्चा की गई।

आदिवासी संस्कृति की झलक पेश की 


दोपहर हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग, महिलाएं और युवा अपने पारंपरिक पहनावे में एकत्रित हुये। समाज भुमकाओं द्वारा प्रकृति शक्तियों की गोंगो कर रैली का शुभारंभ किया गया। सांस्कृतिक रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सभा स्थल पहुंचे। रैली के दौरान पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत और झांकियों ने शहरवासियों का ध्यान खींचा और आदिवासी संस्कृति की झलक पेश की।

प्रकृतिशक्ति गोंगो एवं महापुरुषों के छायाचित्र में माल्यार्पण 

सामाजिक भुमकाओं द्वारा सर्वोच्चशक्ति फड़ापेन की गोंगो, सुमरनी एवं महापुरूषों के चित्रों पर माल्यार्पण कर सभा शुभारंभ किया गया। मंच संचालन संचालन तिरुमाल देवेंद्र कुमरे (ब्लॉक सचिव केजीएम घंसौर) द्वारा किया गया।

अध्यक्षता एवं अतिथिगण 


सभा की अध्यक्षता तिरुमाल एन. आर. भुआर्य (प्रांतीय संयोजक केजीएम, म.प्र.) ने की। मुख्य अतिथि के रूप में इंजीनियर कमलेश तेकाम जिला पंचायत उपाध्यक्ष झ्र मंडला एवं प्रदेश अध्यक्ष, गोंगपा, म.प्र. उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में तिरुमाल आर. एस. ककोड़िया (प्रांतीय अध्यक्ष केजीएम, म.प्र.), तिरुमाल विनोद सिंह वट्टी (प्रांतीय महासचिव केजीएम) और तिरुमाल मोहन ओझा (अध्यक्ष गोंडवाना ओझा महासभा) शामिल थे। इसके अलावा समाज के वरिष्ठ कार्यकर्ता, अधिकारी-कर्मचारी, साहित्यकार, कलाकार, गीत-संगीतकार और जनप्रतिनिधियों ने मंच साझा किया।

कार्यक्रम की मुख्य बातें 


अतिथियों ने अपने संबोधन में समाज की सांस्कृतिक, धार्मिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक दिशा पर विचार रखे। इस वर्ष की थीम के अनुरूप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अवसरों और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि तकनीकी प्रगति का लाभ उठाना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही आदिवासी पहचान, भाषा और संस्कृति को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। सभा के दौरान स्थानीय लोककला और लोकनृत्य रीना, शैला की शानदार प्रस्तुतियां हुईं, जिसमें ढोल, मांदर और पारंपरिक गीतों की गूंज ने वातावरण को जीवंत बना दिया।

ज्ञापन सौंपा गया 

कार्यक्रम के समापन पर कोयतोड़ गोंडवाना महासभा घंसौर ब्लॉक अध्यक्ष तिरुमाल शोभाराम मरावी और गोंगपा ब्लॉक अध्यक्ष तिरुमाल कैलाश भलावी ने एसडीएम घंसौर को राज्यपाल महोदय के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई। यह आयोजन न केवल आदिवासी दिवस की औपचारिकता तक सीमित रहा, बल्कि इसने समाज के भीतर एक नई चेतना और संवाद का मार्ग भी प्रशस्त किया — जहां परंपरा और तकनीक के बीच संतुलन की दिशा में सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.