गोंडवाना कालीन गढ़ी की दीवार तोड़कर बना रहे सड़क, समाज में रोष व्याप्त-
गौरवशाली इतिहास से छेड़छाड़ पर सदम सिंह बरकड़े जनपद अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
छपारा। गोंडवाना समय।
गोंडवाना साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास से जुड़ी छपारा स्थित राजा राम सिंह उइके जी की गढ़ी की दीवार को तोड़कर सड़क का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इससे गोंडवाना शासनकाल से जुड़े एवं आस्था विश्वास रखने वाले जनजातिय समाज के शुभचिंतकों में आक्रोश व्याप्त है।
ऐतिहासिक धरोहर के नाम-निशान मिटाए जा रहे हैं
उक्त बाते जारी विज्ञप्ति में जनपद पंचायत छपारा अध्यक्ष सदम सिंह बरकड़े ने बताया कि गोंडवाना शासनकाल के गौरवशाली इतिहास के अनुसार राजा रामसिंह उइके जी का शासनकाल उल्लेखनीय रहा है। छपारा मुख्यालय में स्थित गढ़ी किला आज भी गर्व से कह रहा है कि यह गोंड वंश की ऐतिहासिक धरोहर है परंतु वर्तमान शासन-प्रशासन द्वारा धीरे-धीरे इस ऐतिहासिक धरोहर के नाम-निशान मिटाए जा रहे हैं।
राजा रामसिंह उइके जी ने बसाया लेकिन पहचान को मोहताज
छपारा आज भी राजा रामसिंह उइके जी की गढ़ी के नाम से जाना जाता है। दुख की बात यह है कि जिस राजा ने छपारा को बसाया, उसी के किले को नष्ट किया जा रहा है। शहर के चौक-चौराहों पर उनके नाम की प्रतिमा तो दूर, स्वागत द्वार पर भी उनका नाम नहीं है।
राजा रामसिंह उइके जी को किया जा रहा उपेक्षित
एक ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राजा शंकर शाह, कुंवर रघुनाथ शाह और रानी दुर्गावती जी के नाम पर छात्रावास बनाने की घोषणा करते हैं, वहीं दूसरी ओर छपारा के संस्थापक राजा रामसिंह उइके जी को उपेक्षित किया जा रहा है।
राजा रामसिंह उइके जी की प्रतिमा स्थापित की जाए
समाज की मांग है कि छपारा के प्रमुख चौक-चौराहे पर राजा रामसिंह उइके जी की प्रतिमा स्थापित की जाए, स्वागत द्वार पर उनका नाम लिखा जाए और सिद्ध बाबा घाट स्थित गढ़ी का सौंदर्यीकरण किया जाए।
मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया
जनपद पंचायत छपारा के अध्यक्ष सदम सिंह बरकड़े द्वारा इस संबंध में कई बार विधायक, सांसद एवं मुख्यमंत्री को पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके विपरीत तोड़फोड़ का कार्य जारी है। इस मुद्दे को लेकर कोया गोंडवाना महासभा छपारा की बैठक हुई। बैठक के बाद जनपद अध्यक्ष सदमसिंह बरकड़े, कोया गोंडवाना महासभा अध्यक्ष श्री सकत धुर्वे, जनपद सदस्य नीलेश मशकोले एवं सुरेंद्र भलावी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि गोंडवाना शासनकाल की गढ़ी किले की दीवार तोड़कर मार्ग बनाया गया है।

